फुलवा को मिला अन्नपूर्णा भंडार योजना का साथ

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तीन साल पहले तक फुलवा देवी घर के आंगन में चारपाई पर बैठकर अक्सर सोचा करती थीं कि काश वे भी घर में कुछ आर्थिक सहयोग कर पातीं| पति के पेंशन के पैसे तो हर महीने समय पर भामाशाह योजना के तहत सीधे खाते में आ जाता थे लेकिन 8 लोगों के बड़े परिवार का पेट पालना कठिन था|

बात उन दिनों की है, जब स्कूल दूर होने की वजह से फुलवा को पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी, जिसका गम उन्हें आज भी है| तभी तय किया कि कुछ भी हो जाए, अपने बच्चों को हर हाल में शिक्षित करना है| दोनों बड़े लड़के प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हुए थे| नौकरी लग जाए तो थोड़ी रहत मिले| बेटी नौंवीं में थी और सबसे छोटा बेटा पांचवीं कक्षा में थी| सास, ससुर जी के इलाज में हर महीने नियमित खर्चा ज़रूरी था, बच्चों की पढ़ाई-लिखाई आवश्यक है और बढ़ती महंगाई दर को देखते हुए घर चलाना कठिन हो गया था| फुलवा ने अपने पति को इन परेशानियों से अवगत कराया और एक सुझाव दिया कि क्यों न वे मिलकर कुछ काम करें| पति को फुलवा की बात पसंद आई और उन्होनें भी हामी भरी|

एक दिन फुलवा के पड़ोस की ताई जी ने बातों-बातों में बताया कि गांव में नया अन्नपूर्णा भण्डार खुला है| यह सरकार की बहुत अच्छी पहल है, अब राशन खरीदने के लिए 5 किलोमीटर दूर नहीं जाना पड़ता| और तो और इसमें एमआरपी से कम दर पर गुणवत्तापरक अनेक उत्पाद उपलब्ध हैं|

अन्नपूर्णा भण्डार जाकर फुलवा की आँखें खुली की खुली रह गई थी| फुलवा ने अपने गांव में इतनी सुन्दर और व्यवस्थित दुकान इससे पहले कभी देखी ही नहीं थी| फुलवा अन्नपूर्णा भण्डार से अत्यधिक प्रेरित हुई और जिज्ञासावश उसने दुकानदार से पूछ ही लिया कि अन्नपूर्णा भण्डार कैसे खोला जाए | इसपर दुकानदार ने बड़ी सहजता से जवाब दिया था, “अन्नपूर्णा भण्डार प्रदेश की महत्वकांशी योजना है जो उधमिता को प्रोत्साहित करती है| बस योजना के क्रियान्वयन हेतु सरकार द्वारा निर्धारित मानदण्डों को पालन करना होता है| अन्नपूर्णा भण्डार के आवंटन हेतु निम्नलिखित बिन्दुओं पर ध्यान देना आवश्यक है:

● डीलर की स्वयं की दुकान होनी चाहिए (यदि किराये की दुकान है तो दूकान मालिक की लिखित सहमति होनी चाहिए)
● दुकान का न्यूनतम क्षेत्रफल 10X20 (200 वर्ग फीट) होना चाहिए
● दुकान कम से कम 30 फीट रोड पर खुलती हुई होनी चाहिए
● इस मॉडल को स्वीकार करने के लिए दुकानदार की सहमति होनी चाहिए

इतना ही नहीं, आवेदक अन्नपूर्णा भंडार खोलने के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत 10 लाख रुपये तक की ऋण के लिए भी आवेदन कर सकते हैं|”

कभी घर के चारदीवारों में बंधकर रहनेवाली फुलवा देवी आज अपने पति के साथ एक अन्नपूर्णा भण्डार का संचालन करती हैं| बड़े गर्व से फुलवा सभी ग्राहकों को अपनी कहानी बताती हैं कि किस तरह से अन्नपूर्णा भण्डार योजना ने उनकी और उनके पूरे परिवार का जीवन संवारा|

फुलवा सबको यही सन्देश देती हैं — “आप भी मिलाएं वसुंधरा राजे सरकार की अन्नपूर्णा भंडार योजना से हाथ और बढ़ें उज्ज्वल कल के साथ|”

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