श्रीमती वसुंधरा राजे की राजस्थान सरकार का वादा – ‘न्याय आपके द्वार’ पर

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आज से बत्तीस साल पहले खेती करने के लिए सुंदरम ने पुन्दलसर, बीकानेर में 7 हेक्टेयर क्षेत्रफल की ज़मीन खरीदी थी| बिक्रीनामे में सुंदरम की जगह नुरसराम लिखा हुआ था| इस लिपकीय गलती की वजह से सुंदरम के दो बेटों, नयनराम और रूपराम, को बहुत सालों तक उस ज़मीन के उपज का कोई मौद्रिक फायदा नहीं मिला| कितने सालों तक सुंदरम के परिवार को इस गलती को सुधरवाने के लिए मशक़्क़त की पर कोई रास्ता नहीं निकल पाया| करीब 29 साल बाद ‘न्याय आपके द्वार‘ की सुनवाई के दौरान उस क्षेत्र के एस डी एम को कुछ मिनट ही लगे याचिकाकर्ताओं को राहत अनुदान करने में|

ग्रामीण भारत में आज भी भूमि अथवा अचल संपत्ति बहुत मायने रखती है| इसीके चलते राज्य सरकार के सामने हमेशा से ही राजस्व विवादों को सुलझाने की चुनौती रही है| ऐसे क्षुद्र विवाद अतिक्रमण अथवा उत्परिवर्तन से जन्म लेते हैं|

पिछले कुछ सालों में राजस्व प्रशासन हर प्रदेश की सरकार के लिए एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण वाद-विषय बन गया है| याचिकाओं की या तो सुनवाई नहीं होती और अगर होती भी है तो परिणाम आने में कई साल लग जाते हैं|

‘न्याय आपके द्वार’ श्रीमती वसुंधरा राजे की राजस्थान सरकार की एक अनूठी पहल है जिसके तहत राजस्व न्यायालय मामलों को हल करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है| राजस्व मामलों में न्याय दिलवाने को एक अभियान का रूप देकर श्रीमती राजे ने यह सुनिश्चित किया है कि ऐसे मामलों की संख्या में गिरावट आये जिससे कि इस अभियान का जनता पर एक सकारात्मक प्रभाव पड़े|

वर्ष 2016 में ‘न्याय आपके द्वार’ अभियान से राजस्व लोक अदालतों द्वारा 20 लाख से ज़्यादा विवाद निस्तारित हुए|

जीवन के आठ दशक देख चुकी चमेली देवी अपने गाँव बुचिया बारा में आयोजित शिविर में गयी थी| उनका ध्येय अपने दोनों बेटों का भूमि विवाद सुलझाना था| और उसमें ज़्यादा समय लगा भी नहीं|

चमेली देवी ने जैसे ही अपनी उलझन राजस्व अधिकारी को बतायी उन्होनें कुछ परामर्श के बाद दोनों बेटों में ज़मीन आधी-आधी बाँट दी|

इस तरह के भूमि से जुड़े विवादों के निपटारे के मामले प्रदेश के हर ज़िले से सामने आ रहे हैं| ऐसे मुद्दों का सुलझाव न केवल तनाव को काम करता है, बल्कि पुलिस एवं राजस्व प्राधिकारी वर्ग पर से काम का दबाव कम कर देता है|

राजस्थान की इस अनूठी पहल, जिसमें हर ज़िले, हर ग्राम में राजस्व लोक अदालत शिविर लगाए जाते हैं और राजस्व विवाद सुलझाए जाते हैं, की प्रशंसा चहुँ ओर की जा रही है| समस्त प्रदेशों को जनता के प्रति समर्पित राजस्थान सरकार की शासन-विधि का अनुसरण करना चाहिए|

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