ई-मित्र – मेरा मिनी बैंक

e-Mitra 2बारां ज़िले का बामला गाँव , 500 से ज्यादा परिवार व 2600 से ज्यादा की आबादी।  2011 सेन्सस के अनुसार गाँव की साक्षरता दर राजस्थान की साक्षरता दर (66.11%) से कहीं ज्यादा 75.35% है।

गाँव में सरकारी योजनाओं की जागरूकता  इसी साक्षरता का परिणाम है। गाँव के महावीर जी बताते है की ग्रामीण युवाओं को योजनाओं की अच्छी खासी जानकारी है और कई बार वो हमें आकर इसकी जानकारी देते है।  

गाँव के एकमात्र ई-मित्र कियोस्क पर जमा भीड़, ग्रामीणों के ई-मित्र सेवाओं से परिचय की कहानी कहती है। 24 वर्षीय, लोकेश ई-मित्र पर अपने बिजली का बिल जमा कराने के लिए आया है।

बिजली-पानी बिल, परीक्षा फॉर्म भरना, आधार कार्डभामाशाह कार्ड बनवाना या अद्यतन हो, सब एक छत के नीचे होने से बहुत सुविधा हुई है। लेकिन सबसे ज्यादा सुविधा मुझे ई-मित्र की बैंकिंग सेवाओं से मिली है। ई-मित्र द्वारा मैं अपनी छात्रवृत्ति की राशि आसानी से, माइक्रो एटीएम द्वारा ई-मित्र संचालक से प्राप्त कर लेता हूँ। ई-मित्र मेरा मिनी बैंक बन चुका है।

इसी तरह देव नारायण जी अपनी वृद्धावस्ता पेंशन के लिए ई-मित्र पर हर महीने लाभ उठाने आते है।

बामला गाँव में युवा से लेकर बुज़ुर्ग सभी, नकद लाभ ई-मित्र पर मौजूद माइक्रो एटीएम द्वारा आसानी से प्राप्त करते है।

गाँव के सभी लोग ई-मित्र द्वारा उपलब्ध करवाई जा रही बैंकिंग सेवाओं का प्रतिदिन लाभ उठा रहे है।  गाँवों में बैंक न होने की वजह से होने वाली कई दिक्कतों को अब ई-मित्र ने दूर कर दिया है।

e-Mitra 3

अब ग्रामीण अंचल बैंकिंग सेवाओं के लाभ उठाने में शहरी क्षेत्रों से पीछे नहीं है।  

सरकार की इस अनूठी योजना ने गाँवों एवं शहरों के बीच के अंतर को कम कर दिया है। जो बैंकिंग सेवाएं गाँव के लोगों के लिए एक सपना थी , आज वो हक़ीक़त में जन-जन तक पहुँच चुकी है।  

लोकेश और देव नारायण जी जैसे कई लोग सरकार के इस गुड गवर्नेंस व ई-गवर्नेंस के प्रयासों से बहुत खुश है।  

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