सफलताएं जो बनी प्रेरणा – सिद्धराज जी की कहानी “ग्राम कोटा – 2017”

Gram kota 2ग्राम 2017, सरकार की ओर से किसान हितों में उठाया गया एक सराहनीय कदम है।  खेती के क्षेत्र में होने वाली नित -नयी खोजों व परिवर्तन खेती से कैसे किसान भाई अपनी खेती को उत्तम व पैदावार को बढ़ा सकते है इसकी पूरी जानकारी आपको राजस्थान सरकार द्वारा आयोजित “ग्राम-2017” में मिलेगी जो इस बार कोटा में आयोजित हो रहा है।

खेती में नवीन तरीकों व उन्नत तकनीकों से कैसे अच्छे परिणाम लाये जा सकते है , उसके कई उदाहरण हमें यहाँ देखने को मिलेंगे जो अन्य किसानों के लिए प्रेरणा है, आइए जानते है एक ऐसी ही सफलता की कहानी।

दुडकली ग्राम पंचायत रीछडिया पंचायत समिति, खैराबाद जिला कोटा के श्री सिद्धराज सिंह जी का एकमात्र आय का स्त्रोत कृषि है।  उनके पास 8.5 हेक्टर पैतृक कृषि भूमि है जिस पर होने वाली खेती पर ही उनका परिवार निर्भर है।  सेकेंडरी तक शिक्षा पाने वाले सिद्धराज जी बताते है की उनकी ज़मीन एक असिंचित क्षेत्र में है जहाँ केवल कुओं के पानी द्वारा ही सिंचाई संभव है।

ख़रीफ व रबी सीज़न की फसलें जैसे ज्वार, मक्का, उड़द, सोयाबीन व गेंहू, सरसों, चना, धनिया जैसी फसलें उनकी मुख्य फसलों में से एक थी जो पूरी तरह से मौसम पर निर्भर थी। अधिक बारिश व सूखा फसलों की पैदावार को अत्यधिक रूप से प्रभावित करता था। इस से आर्थिक नुकसान की संभावनाएं बनी रहती थी।  

लेकिन वर्ष 2000 में उनकी मुलाकात उद्यान विभाग के पर्यवेक्षक से हुई और वहीँ से सफलता की कहानी ने रफ़्तार पकड़ी। सिद्धराज जी ने सरकारी अनुदान की सहायता से 2.5 हेक्टर ज़मीन पर संतरे का बगीचा बनाया जहाँ बूँद-बूँद सिंचाई प्रणाली सरकारी अनुदान से स्थापित किया।  

4 वर्षों तक उन्होंने इन पौधों के साथ ही अन्य फसलें उगाई जिस से उनके आय के स्त्रोत खुले रहे।  4 वर्षों बाद फलोत्पादन के साथ ही उनकी आय में कई गुना का इज़ाफ़ा हुआ। जहाँ पहले उन्हें केवल 2 से 2.5 लाख रूपए की ही आमदनी होती थी अब 2.5 हेक्टर में ये आय बढ़कर 7.5 लाख रूपए पहुँच गयी। बूँद-बूँद सिंचाई ने कम पानी की उपलब्धता की समस्या को भी दूर कर दिया।   

परंपरागत खेती से हट कर इन नवीन तरीकों ने उनके जीवन को एक नयी दिशा दी। उद्यान विभाग द्वारा राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत बगीचों की सार – संभाल के लिए उपलब्ध करवाए गए उपकरण, उर्वरक व किट के माध्यम से खेती को उन्नत बनाने में सहयोग मिला।  

सिद्धराज जी को विश्वास है की आने वाले वर्षों में वो इन नवीन खेती के तरीकों को अपनाते हुए और भी अच्छे परिणाम लाएंगे। उनका कहना है की सभी किसान भाइयों को अपने कृषि भूमि के एक हिस्से में फलदार बगीचें लगाने चाहिए जिस से प्रतिकूल परिस्तिथियों में उन पर कोई आर्थिक संकट न आये और आय का एक ठोस स्त्रोत बना रहे।  

ग्राम 2017 भी इसी क्षेत्र में किसान भाइयों के हित में सरकार की ओर से एक अनूठी पहल है। ग्राम कोटा 2017 में आप खेती के क्षेत्र में होने वाली नवीनतम खोजों, तकनीकों के इस्तेमाल व अधिक उपज की खेती के सम्बद्ध में विशेषज्ञों व सफल किसानो के अनुभवों का लाभ उठा सकते है।

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