राजस्थान: भारत का उभरता हुआ आईटी हब बनने की ओर अग्रसर

2017-07-13

राजस्थान आईटी /आई.टी.ई.एस पॉलिसी – 2015

आज राजस्थान उन विकसित राज्यों में से एक है जहाँ ई-गवर्नेंस जैसे मजबूत सिस्टम के माध्यम से लोगों को विभिन्न सेवाएं प्रदान की जा रही है। यहाँ विभागों को प्रौद्योगिक रूप से सक्षम बनाने  के लिए विभिन्न वेब सर्विसेज़ के माध्यम से सेवाओं के वितरण की एक संयुक्त और एकीकृत कार्यप्रणाली का विकास किया गया। राजस्थान में ई-इनिशिएटिव की शुरुआत भर से ही आज राज्य देश में प्रभावी, कुशल, सुलभ और पारदर्शी शासन का उदाहरण बन गया है।    

राजस्थान के लगभग सभी विभाग विभिन्न ए.पी.आई /वेब सर्विसेज़ के माध्यम से आज तकनीकी रूप से सक्षम है जो राज्य में ई-इनिशिएटिव का ही एक हिस्सा है। सरकार की आईटी /आई.टी.ई.एस की जो नीति है वो राजस्थान को भारत का उभरता हुआ आई.टी हब बनाने की ओर एक सकारात्मक कदम है। राज्य की आईटी पॉलिसी और स्टार्टअप पॉलिसी दोनों ने साथ मिलकर एक ऐसे मजबूत पथ का निर्माण किया है की आज राजस्थान, आई.टी प्रोफेशनल्स और निवेशकों के लिए अनुकूल और पसंदीदा विकल्प बन गया है।

आई.टी/आई.टी.ई.एस – 2015  पॉलिसी  के लक्ष्य:

राजस्थान सरकार का ध्यान पूर्ण रूप से इस बात पर केन्द्रित है की राज्य के निवासियों को ऐसा ई-गवर्नेंस  उपलब्ध करवाएं जिसमें सभी नागरिकों की भागीदारी हो और वो पूर्णतया पारदर्शी हो।

राजस्थान आई.टी के क्षेत्र में अपनी पहचान बना सके, इसके लिए सरकार ने कुछ मुख्य बिन्दुओं पर ज़ोर दिया है-

  • 2020 तक 7 स्मार्ट सिटिज़ की स्थापना।
  • उत्तरी और पश्चिमी भारत में जयपुर की आई.टी, आइ.टी.ई.एस  और आर एंड डी हब के रूप में ब्रांडिंग तथा पोज़िशनिंग करना।
  • आई.टी निवेश के लिए एक बेहतर स्थान के रूप में राजस्थान की पहचान बनाना।
  • आई.टी के लिए एक बेहतर एनवायरमेंट की स्थापना करना।

 

 आई.टी/आइ.टी.ई.एस  पॉलिसी  के उद्देश्य: राज्य में आईटी के विभिन्न क्षेत्रों को कवर करना जो की इस प्रकार है:  

  • आई.टी सेक्टर में  लगभग 5,00,000 तक स्किल्ड  प्रोफेशनल्स  प्राप्त करना।  
  • कम से कम 2,000 टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स का विकास करना।
  • प्रत्येक परिवार से दो लोगों (कम से कम एक महिला ) को ई-लिटरेट बनाना।
  • आई.टी /आइ.टी.ई.एस /ई एस डी ऍम सेक्टर को प्राथमिकता देना।
  • आई.टी कारोबार के मौजूदा निवेश को 50,000 करोड़ तक बढ़ाना।
  • राज्य से आई.टी निर्यात को 5000 करोड़ तक बढ़ाना।
  • सरकारी दस्तावेजों का ऑटोमेटेड वन-टाइम-वेरिफिकेशन प्रणाली के माध्यम से सत्यापन करके सेवाओं का वितरण करना।
  • पंचायती स्तर पर कनेक्टिविटी स्थापित करना।
  • राज्य का एक केंद्रीकृत ,एकीकृत और संयुक्त डाटासेट।
  • रोबोटिक्स का प्रचार।
  • ओपन सोर्स टेक्नोलॉजी का प्रचार।

आई.टी /आइ.टी.ई.एस  जगत के विकास के लिए राजस्थान सरकार इंडस्ट्रीज़ को विभिन्न प्रकार के लाभ और छूट उपलब्ध करवा रही है जो इस प्रकार है :

  • 100 % तक विएटी (वेल्यु एडेड टेक्स ) लाभ ।
  • उपक्रम/एंटरप्राइज को अनुकूलित लाभों का पैकेज उपलब्ध करवाना।
  • आई.टी /आइ.टी.ई.एस ,इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिज़ाइन और मैन्युफैक्चरिंग व रोबोटिक्स प्रायोरिटी सेक्टर घोषित।
  • कनेक्टिविटी के लिए बैंडविड्थ पर सब्सिडी।
  • राजस्थान वेंचर कैपिटल फण्ड /एस.एम.ई टैक फण्ड आर.एस.वि.एफ l
  • ज़ोनिंग रेगुलेशन और लैंड कन्वर्शन में छूट।
  • ब्याज़ में छूट।
  • पेटेंट फिलिंग और क्वालिटी सर्टिफिकेशन की राशि का पुनर्भरण।
  • बेहतर प्रदर्शन के लिए पुरस्कार।
  • मैनपावर विकास के लिए सब्सिडी।

राज्य में आई.टी सेक्टर के विकास के लिए और भी कई ऐसे लाभ और प्रोत्साहन है जो सरकार उपलब्ध करवा रही है

अपने ई-गवर्नेंस सिस्टम की बदौलत आज राजस्थान भारत का एक उभरता हुआ आई.टी हब बन रहा है । ऐसी प्रौद्योगिक पहल के कारण ही आज राजस्थान आई.टी प्रोफेशनल्स और इन्वेस्टर्स की पहली पसंद बन गया है। समकालीन विश्व अर्थव्यवस्था की बात करें तो भारत आई.टी निर्यात करने वाला दूसरा विशालतम देश है।

आई.टी पॉलिसी-2015, के अनुसार राजस्थान सरकार का एकमात्र उद्देश्य है की,राजस्थान हर दिन सूचना  प्रौद्योगिकी के नए आयामों को छुए।

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