राजनेट:एक बहुआयामी नेटवर्क सिस्टम

प्रथम “राजस्थान आईटी डे” के अवसर पर मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे द्वारा 21 मार्च 2016 को “राजनेट” की शुरुआत की गई। इससे पहले एकीकृत नेटवर्क संचालन केंद्र के अभाव में दूरस्थ क्षेत्र के विभागों से संपर्क साधने में परेशानी होती थी । जब से इस परियोजना की शुरुआत हुई है आज ग्राम पंचायत स्तर तक एल.ए .एन/एस.डब्लू.ए.एन/ब्रोडबेंड/ओवर द एयर/सेटेलाईट के माध्यम से कनेक्टिविटी है। राजनेट का उपयोग सम्पूर्ण राजस्थान में विभिन्न तरीकों (VSATऔर टेरेस्ट्रियल) के माध्यम से संपर्क साधने में किया जाता है। राज्य में विभिन्न तरीकों से संपर्क बनाने की इस योजना की देख-रेख के लिए एक “एकीकृत नेटवर्क संचालन केंद्र” की स्थापना हुई।

राजनेट, वोइस ,वीडियो और डाटा कनेक्शन के साथ ही नागरिक सेवाओं जैसे भामाशाह ,ई-मित्र और मनरेगा के वितरण को सम्पूर्ण राज्य में प्रभावी बनाने में सुगमता प्रदान करता है। यह एक बहुआयामी नेटवर्क सिस्टम है जो राजधानी ‘जयपुर’ को राजस्थान की 9,894 ग्राम पंचायतों और 183 नगर क्षेत्रों से जोड़ रहा है।

     राजनेट के अभिनव पहलू :

  • राजनेट एक एकीकृत नेटवर्क है जो कई नेटवर्क (राज SWAN,सेक LAN) से जुड़ा हुआ है।
  • राजनेट, वीसेट,केप्टिव ओ.एफ.सी,आरएफ और टेरेस्ट्रियल  कनेक्टिविटी से परिपूर्ण है जिसकी देख-रेख के लिए एकीकृत नेटवर्क संचालन केंद्र है।
  • इस परियोजना ने ग्राम पंचायत स्तर तक भी आईपी टेलीफोनी सुनिश्चित किया है जो भारत में प्रथम है ।
  • वीएसएटी के माध्यम से ग्राम पंचायतों तक कनेक्टिविटी को बढाया है।
  • वीएसएटी कनेक्टिविटी के लिए केप्टिव हब की स्थापना। ग्राम पंचायत स्तर तक टेरेस्ट्रियल लिंक कनेक्टिविटीऔर पर्याप्त  बैंडविड्थ सुनिश्चित करना

 राजनेट से होने वाले लाभ :

 

  • राजनेट, वोइस ,वीडियो और डाटा कनेक्शन के साथ ही नागरीक सेवाओं जैसे भामाशाह ,ई-मित्र और मनरेगा के वितरण को सम्पूर्ण राज्य में प्रभावी बनाने में सुगमता प्रदान कर रहा है।
  • राजनेट विभिन्न स्थानों पर सरकारी अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को सक्षम कर रहा है।
  • राजनेट दूरस्थ क्षेत्र के विभागों से कनेक्टिविटी उपलब्ध करवा रहा है।
  • राजस्थान नेटवर्क ग्राम पंचायत स्तर तक LAN/SWAN/ब्रोडबेंड/ओवर द एयर/सेटेलाईट के माध्यम से सुगमतापूर्वक कनेक्टिविटी उपलब्ध करवा रहा है।

“राजनेट राजस्थान सरकार द्वारा  दूरस्थ क्षेत्रों को तकनिकी से जोड़ने का एक अनोखा प्रयास”

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